Garud Puran Kya Hai-गरुड़ पुराण की सम्पूर्ण कथा
हेल्लो दोस्तो स्वागत है आप सबो का हमारी वेबसाइट SB Creation में आज हमने इस आर्टिकल में गरुड़ पुराण -Garud Puran की सम्पूर्ण जानकारी दी है।अगर आप भी गरुड़ पुराण के बारे में सर्च कर रहे हैं तो ये आर्टिकल आपके लिए है।
गरुड़ पुराण कहता है जहाँ जीवन है वहाँ मृत्यु निश्चित है ।अथार्त जो प्राणी जन्म लेता है उसे समय आने पर एक न एक दिन मरना ही पड़ता है।और जो मरता है उसका जन्म निश्चित है।
पुराण साहित्य में गरुड़ पुराण का एक प्रमुख भाग है।हिन्दू धर्म मे किसी मनुष्य को मरने के बाद गरुड़ पुराण का पाठ करने से बेंकुठ लोक की प्रप्ति होती है।इस गरुड़ पुराण में कुल 289(दो सौ नेवासी) अध्याय और अठारह हज़ार श्लोक है।
वैदिक ऋषि महर्षि कश्यप का बेटा और पक्षी नरेश गरुड़ को विष्णु भगवान का आनेजाने का साधन कहा जाता है। एक बार पक्षी नरेश गरुड़ ने विष्णु जी से मरने के बाद की स्थिति,प्राणियों की स्वर्ग और नरक यात्रा, विभिन्न बुरे कामों से जीव को मिलने वाले योनियों एवं पाप करने वालों की बुरी स्थिति से जुड़े कई रहस्य से भरे प्रश्न किये। उस वक्त विष्णु जी ने गरुड़ को जो उत्तर उपदेश के रूप में सुनाये,वही उपदेश इस पुराण में भी है।
गरुड़ पुराण- मौत के बाद आत्मा
गरुड़ पुराण के अनुसार मरने वाले व्यक्ति के पास पहले से ही यम दूत आकर खड़े हो जाते हैं। तथा उनके यमराज रूप को देख कर जीवित प्राणी रोने लगता है, उसे डर लगने लगता है, वह कुछ कहना चाहता है ।मगर उसके मुह से अजीबो गरीब आवाजें निकलती हैं और वह किसी को अपनी भाषा समझा नही पता ।
जीवित प्राणी को इतना भय लगता है, कि वह शरीर से मल-मूत्र का त्याग कर देता है और उसी के साथ आत्मा शरीर से बाहर निकल जाती है। परन्तु वह आत्मा यमदूतों के आगे जीवन की भीख मांगती है। और बार-बार उस मरा शरीर मे प्रवेश पाने की कोशिश करती है ।मगर यमदूत उसे रस्सी से बांध कर रखते हैं।
ऐसा कहा गया है कि आत्मा तब तक यमदूतों के कब्जे में रहती है, जब तक की मृत शरीर का अंतिम संस्कार नहीं कर दिया जाता है। तथा शरीर का पंच तत्व में विलीन होने के पश्चात आत्मा को छोड़ दिया जाता है ।और वह जीवन जीने के लिए तड़पती आत्मा अपनी जलती चिता को देख कर विलाप करती है।
गरुड़ पुराण के अनुसार मौत के बाद आत्मा तेरह 13 दिन तक अपने घर वालों के साथ रहती है व उन्हें रोता बिलखता हुआ देख रोती है और जो व्यक्ति मृत शरीर को चिता देता है ।उसे आत्मा परेशान करने का भी प्रयास करती है।
और यह पूछती है कि उसने उसके शरीर को क्यों जला दिया इसीलिए चिता देने वाले व्यक्ति को 13 दिन तक कभी अकेला नहीं छोड़ा जाता।
गरुड़ पुराण - यमलोक पहुचने के बाद क्या क्या होता है|
मृत्युलोक तक पहुचने के लिए आत्मा को 47 दिन की यात्रा करनी पड़ती है तथा यह रास्ता बहुत ही दुःख देने वाला होता है जहां उसे खून और पीप की नदी (वैतरणी नदी )को तैरते हुए पार करना पड़ता है।
उस नदी को पार करने में उन्ही लोगों को आसानी होती है। जिनके मरते वक्त घर वालों ने उनके हाथ मे गौ की पूछ पकड़ाई हो और तेवारी को गौ दान दिया हो इसके अलावा इन 47 दिनों में आत्मा को किन-किन रास्तों से गुजरना पड़ता है यह जानने के आपको गरुड़ पुराण पढ़ना होगा।
यमलोक पहुँचने के बाद यमदूत उस आत्मा को यमराज के सामने ले जाते हैं जहां उसे अपने जीवित अवस्था में किए पाप और पुण्य बताए जाते हैं औऱ फिर उसके हिसाब से अलग-अलग सज़ा सुनाई जाती है।
अच्छे काम करने वालों को स्वर्ग मिलता है। जहां देवताओं का वास होता है और आत्मा को दुःख के संसार से मुक्ति मिलती है बाकी बुरे कर्म करने वालों को नरक मिलता है। गरुड़ पुराण के अनुसार कुल 36 प्रकार के नरक हैं जिसमे अलग-अलग पाप करने वालों को उसी के अनुसार सज़ा सुनाई जाती है।
गरुड़ पुराण - मरने के बाद कर्मो का फल
कहा जाता है कि अच्छे कर्म (पूण्य)करने वालो को स्वर्ग में लोक होती है।और इसी प्रकार बुरे कर्म (पाप)करने वाले को नरक में अपने बुरे कारमो का फल भोगना पड़ता है।इस संबंध में गरुड़ पुराण में बिषतार से बताया गया है।
बुजुर्गों को अपमान करने वाले
गरुड़ पुराण के अनुसार जो व्यक्ति बुजुर्गों को अपमान यथवा नीचा दिखाने का काम करता है ।उसे नरक लोक में वास होना निश्चित है।ऐसे लोग मरने के आग के झोंक में धकेल दिया जाता है।
निस्वार्थ रहने वाले पति पत्नी
गरुड़ पुराण में कहा गया है वैसे पति या पत्नी जो अपने हित के लिए सवार्थी बनने वाले को नरक में वास होता है।उसे लोहे के गर्म सालखो से पीटा जाता है।
निर्दोषो को हत्या करने वाले
वैसे लोग जो अपने हित के लिए निर्दोष जीवो को हत्या कर देते हैं।यथवा अपने इच्छा अनुसार जीवों को हत्या कर खाते हैं उसे नरकलोक में जाना निश्चित है।गरुड़ पुराण में कहता है ऐसे लोगो को गर्म तेल में तल दिया जाता है।
दोस्तों इस आर्टिकल में मैंने गरुड़ पुराण की सम्पूर्ण कथा आपके सामने प्रकट करने की प्रयाश किया ।
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